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शनिवार, 16 मई 2020

सुराजी गांव योजना बना ग्रामीण परिवेश में जनजागृति का सशक्त माध्यम

  • समावेशित ग्राम्य विकास से आयी है खुशहाली और समृद्धि
  • गौठानों में आजीविका गतिविधि से जुडऩे से महिलाओं के लिए खुली उन्नति की राहें
     राजनांदगांव।  राज्य शासन की सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरवा अउ बाड़ी समावेशित ग्राम्य विकास की बुनियाद है। यह योजना ग्रामीण परिवेश में अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ ही जनजागृति का सशक्त माध्यम है। मेहनतकश किसानों के हित के लिए शिद्दत से किए गए प्रयास से उनके जीवन में खुशहाली आ रही है। जिला राजनांदगाव में प्रथम चरण में  कुल 113 गौठानों  का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका  है, वही दूसरे चरण में 282 गोठानों  का  निर्माण प्रगतिरत है।
        गौठान के माध्यम से पशुओं को पौष्टिक आहार,  टीकाकरण, वर्मीकम्पोस्ट खाद निर्माण, बाड़ी में सब्जी उत्पादन कर स्व सहायता समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि करना एवं नरवा के माध्यम से जल संरक्षण एवं मत्स्य पालन किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण विकास के लिए राज्य शासन की प्रतिबद्धता प्रकट होती है।
कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य के निर्देशों एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती तनूजा सलाम के मार्गदर्शन में गोठान के माध्यम से  एनआरएलएम योजना के स्व सहायता समूह की महिलाओं को आजीविका गतिविधि से जोडऩे का अथक प्रयास जारी है । इस कड़ी के  प्रथम चरण में सभी 9 विकासखण्डों में एक-एक मॉडल गौठान का चयन किया गया है, वहां मल्टी एक्टिविटी सेन्टर का निर्माण कराकर स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। साथ ही अन्य गौठान में भी आय वर्धक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वर्तमान  में  जिले के प्रथम चरण  में गौठान में वर्मीकम्पोस्ट खाद एवं नाडेप खाद का निर्माण 15 स्व सहायता समूह  की कुल 136 महिलाएं कर रही हैं। कुल 291 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट का निर्माण  किया जा चुका है, 211  क्विंटल खाद का विक्रय कर कुल 186485 रूपए की आय अर्जित की जा चुकी है। शेष खाद की बिक्री प्रक्रियाधीन है। साथ की  लगभग 150 क्विंटल  वर्मीकम्पोस्ट  का निर्माण प्रक्रियाधीन है, जो इस योजना की एक बड़ी उपलब्धि  दर्शाती  है, सभी  विकासखण्ड के मॉडल गोठान ग्रामों  में चैन लिंक वायर का निर्माण भी समूह की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। जिससे गौठान में फेंसिंग कार्य में इसका  उपयोग कराकर समूह की महिलाओं को लाभान्वित किया जा सके। 
          वर्तमान में 9  स्व सहायता समूह  की 84  महिलाएं इस कार्य को अंजाम दे रही हैं। अभी तक 81  क्विंटल तार का निर्माण किया जा चुका  है, जिसमें से 71  क्विंटल तार लगभग चार लाख रूपए का विक्रय  किया जा चुका है। इसका निर्माण लॉक डाउन पीरियड में भी लगातार जारी है। योजना के तहत गौठान में सामुदायिक बाड़ी  का निर्माण भी समूह की महिलाएं कर रही हैं, वर्तमान में 12 समूह की महिलाएं विभिन्न सब्जी का उत्पादन  कर रही हैं। इसमें मनरेगा योजना द्वारा बाड़ी में कार्यरत महिलाओं को दैनिक मजदूरी का भी प्रावधान रखा गया है। बाड़ी में लौकी, भिंडी, बरबट्टी, तोरई, भाजी की खेती की जा रही है। वर्तमान तक 6 क्विंटल का उत्पादन एवं इसका विक्रय कर आय प्राप्त की जा चुकी है एवं क्रमश: यह कार्य जारी है। इसी तरह 7 विकासखण्डों में 8 समूह की 39 महिलाएं गोबर से गमले बनाने का कार्य भी कर रही हैं, 5000 गोबर के गमले वर्तमान तक बनाये चुके हैं, गमलों की बिक्री कर हजारों रूपए की आय अर्जित की गई है, शेष गमलों की बिक्री के लिए विभागीय समन्वय किया जा रहा है, इसके अलावा राज्य शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक गौठान में डबरी निर्माण का कार्य भी मनरेगा योजना के माध्यम किया जा रहा है, ताकि समूह की महिलाओं को मत्स्य पालन गतिविधि से जोड़ा जा सके। राज्य शासन के निर्देशानुसार गौठानों में मल्टी एक्टिविटी सेंटर के माध्यम से जिस तरह विभागीय समन्वय से स्व सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आय वर्धक गतिविधि से लाभान्वित किया जा रहा है, निश्चित ही यह महिला सशक्तिकरण एवं उनके आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

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