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मंगलवार, 10 दिसंबर 2019

कविताएं केशव शरण


अभिव्यक्ति एक भूख
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कलाओं को समृद्ध करना था
कर दिया
कलाओं के लिए मरना था
मर लिया
संसार की सच्ची प्रतिभाओं ने
अपना काम किया

बाज़ार को जितनी आवश्यकता थी
उसने उतना लिया-दिया
जीवन-अभिव्यक्ति की आवश्यकता अनंत थी
अनंत है

अभिव्यक्ति भी एक भूख है
भिडंत है
सबसे ज़्यादा छिनी जाती हैं
जिसकी रोटियां
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समाधि
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समाधि !
मुझे ले चलो
उस लोक में
जहां अनन्य सौंदर्य, अनुपम कविता है

तुम योगियों की साधना हो
साधने चला हूं मैं भी
समाधि !
मुझे ले चलो
उस लोक में
जहां बह रही प्यार की सरिता है
और रह रही रूह
मेरी जान की
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पूरा दिन
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पूरा दिन
एक ही पहाड़ पर
बीत गया
एक ही चट्टान पर
बैठे-बैठे
जंगल निहारते
घाटी में धान की
सब्ज़ फ़सल निहारते

बहुतेरी ख़ूबसूरत
चट्टानों का यह पहाड़
और सामने
पहाड़ों की पूरी श्रृंखला
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जाड़े की धूप
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जगत को
जगमग-जगमग
कर रही है धूप

पर इससे भी बढ़कर
जगत के प्राणियों के
शुष्क
मलिन
रिक्त
ठंडे रोम कूपों को
अपनी अमृतमयी
धवल
जीवनोष्मा से 
भर रही है धूप
कोमल
कमनीय
अनूप
यह जाड़े की धूप
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केशव शरण
23-08-1960 
प्रकाशित कृतियां- तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह) जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)
दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह) कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह) एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह) दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह) क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं )  न संगीत न फूल ( कविता संग्रह) गगन नीला धरा धानी नहीं है ( ग़ज़ल संग्रह )
संपर्क --एस2/564 सिकरौल
वाराणसी  221002
मो.   9415295137

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