राजनांदगांव। प्रतिकूल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, कीटव्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से फसल खराब होने पर किसानों को होने वाले नुकसान से राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रारंभ की गई है। जिले मंे रबी फसलों का बीमा कराने के लिए आगामी 26 दिसम्बर तक गांवों में शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविर लगाने का कार्य आज से शुरू हो गया है। रबी फसलों की बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2019 निर्धारित है।  
    कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि अधिसूचित क्षेत्र मंे अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी किसान बीमा के दायरे में आएंगे। अधिसूचित क्षेत्रफसल के सभी ऋणी किसान जिनके लिये विŸाीय संस्थाओं से अंतिम तिथि या उनके पूर्व ऋण सीमा स्वीकृतनवीनीकृत की गई है, बीमा आवरण में अनिवार्य रूप से शामिल हैं। अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी अऋणी किसान स्वेच्छिक बीमा आवरण के दायरे में आएंगे। रबी मौसम की अधिसूचित फसलों में चना, गेहूं सिंचित, गेहूं असिंचित, राई-सरसों, अलसी ग्राम स्तर पर शामिल हैं।
    अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत निम्नानुसार जोखिमों में बीमा आवरण उपलब्ध होगा। बाधित बुआईरोपण जोखिम- विपरीत मौसम अवस्थाओं के कारण अधिसूचित क्षेत्र के 75 प्रतिशत क्षेत्र बुआई न होने पर बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति दी जाएगी। खड़ी फसल पर गैर बाधित जोखिमों यथा- सूखा, शुष्क अवधि, बाढ़, जलप्लावन, कीट व्याधि, भू-स्खलन, प्राकृतिक अग्नि दुर्घटना, आकाशीय बिजली, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, आंधी, भंवर एवं बंवडर के कारण अधिसूचित फसल में अनुमानित उपज, थ्रेसहोल्ड उपज सेे 50 प्रतिशत से कम होने की संभावना पर संभावित दावों का अधिकतम 25 प्रतिशत का अग्रिम भुगतान, अंतिम दावों से समायोजित होगा। फसल कटाई के उपरांत होने वाले नुकसान- अधिसूचित फसलों के कटाई उपरांत सूखने लिये खेत में छोड़ी गई फसल को चक्रवातचक्रवातीय वर्षा एवं बेमौसमी वर्षा से होने वाले नुकसान के लिये कटाई उपरांत अधिकतम दो सप्ताह अर्थात् 14 दिनों के लिये बीमा का प्रावधान होगा। जिस हेतु बीमा कंपनी को 72 घंटे पूर्व सूचित किया जाना आवश्यक है। अधिसूचित क्षेत्र में पृथक कृषि भूमि को प्रभावित करने वाली ओला वृष्टि, भू-स्खलन एवं जल भराव के अभिचिंहित स्थानीयकृत जोखिमों से होने वाले क्षति से सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके लिए बीमा कंपनी को 72 घंटे पूर्व सूचित किया जाना आवश्यक है। अधिकारियों ने बताया कि व्यापक आधार पर आपदा के कारण उपज में होने वाले नुकसान का आकलन फसल कटाई प्रयोग से किया जाता है। 
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत गेहूं सिंचित एवं गेहूं असिंचित का प्रति हेक्टर ऋणमान क्रमशः 33 हजार रूपए एवं 20 हजार  है, जिसका 1.5 प्रतिशत अर्थात् किसानों द्वारा देय प्रीमियम राशि 495 रूपए गेहूं सिंचित तथा 300 रूपए गेहूं असिंचित के लिए प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा। इसी प्रकार कृषक द्वारा चना फसल के लिए प्रीमियम राशि 473 रूपए, अलसी फसल के लिए 188 रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा।
    बीमा कराने के लिए ऋणी किसानों का बीमा संबंधित बैंक, सहकारी समिति द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा, उन्हें केवल घोषणा एवं बुवाई प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। अऋणी किसानों को बैंक, सहकारी समिति एवं लोक सेवा केन्द्र में बीमा प्रस्ताव फार्म, आधारकार्ड, बैंक पासबुक, भू-स्वामित्व साक्ष्य (बी-1 पांचसाला)किरायदारसाझेदार कृषक का दस्तावेज, बुवाई प्रमाण पत्र एवं घोषणा पत्र जमा कर बीमा करा सकते हैं।
हर गांव में 26 दिसंबर 2019 तक ग्राम सभा और शिविर का आयोजनः-         
     जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा अंतर्गत जिले के शत प्रतिशत किसानों को बीमा आवरण में लाने के लिए आज से 26 दिसंबर 2019 तक हर गांव में किसान ग्रामसभा या शिविर आयोजित किये जा रहे है। किसान ग्राम सभाओं या शिविरों में उपस्थित पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एवं बैंक, सहकारी समिति के अधिकारी-कर्मचारी से सम्पर्क कर अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।
व्यापक क्षति स्तर पर फसल कटाई प्रयोग से क्षति निर्धारण -
    किसानों द्वारा प्रीमियम राशि देय मात्र से दावा राशि की पात्रता नहीं बनती है और न ही अकाल, सूखा अनावारी रिपोर्ट के आधार पर इसका निर्धारण किया जाता है। योजना के अंतर्गत बीमा दावा राशि का निर्धारण  बीमित ग्राम एवं फसल में पटवारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा आयोजित 2-2 (कुल 4 प्रति फसल) फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त वास्तविक उपज का, निर्धारित थ्रेसहोल्ड उपज से तुलना उपरांत बीमा कंपनी की ओर से होता है। उपज में कमी के प्रतिशत के मान से दावा राशि का भुगतान किया जाता है। प्रत्येक बीमा इकाई के विगत 7 वर्षों के उपज आंकडों में से 5 वर्षों के उच्चतम आंकड़ांे के आधार पर बीमा इकाईवार या फसल वार थ्रेसहोल्ड उपज का निर्धारण होता है, जो पूर्व से निर्धारित रहता है। 
फसल कटाई प्रयोग से वास्तविक उपज का निर्धारणः- 
    फसल कटाई प्रयोग योजना की आत्मा है। भू-अभिलेख द्वारा आबंटित रैण्डम नंबर से चयनित खसरा एवं प्लाट में निर्धारित संख्या में आयोजित फसल कटाई प्रयोग की औसत उपज से प्रति हेक्टेयर वास्तविक उपज का निर्धारण होता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से अपील है कि निर्धारित अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2019 के पूर्व अपनी फसलों का बीमा नजदीकी, संबंधित सहकारी समिति, बैंक, बीमा प्रदायक कंपनी (एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमि.), लोक सेवा केन्द्र से कराएं। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिये कृषि विभाग, राजस्व विभाग, बैंक एवं बीमा कंपनी से सम्पर्क किया जा सकता है।