कवर्धा, ।  कबीरधाम जिले में आदिवासी बैगा बाहूल बोड़ला और पंडरिया विकासखंड के वनांचल क्षेत्रों में सुरक्षित संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़ाने और एनीमिया सहित कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। जिले के इन दोनों विकासखण्डों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस अनूठी पायलट प्रोजेक्ट अभियान का नाम संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़ाने के लिए “जचकी अगोरा घर“ और कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति दिलाने के लिए “सुपोषण दीदी“ का नाम दिया गया है। यह निर्णय आज कलेक्टर श्री अवनीश कुमार शरण द्वारा महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक में लिया गया।
    कलेक्टर श्री अवनीश कुमार शरण ने इन दोनों कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाने और सुपोषण दीदी की नियुक्ति के लिए दोनो विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। कलेक्टर ने श्री शरण ने बताया कि कबीरधाम जिले के पंडरिया और बोड़ला दो ऐसे विकासखण्ड है, जहां प्रदेश के अति पिछड़ी जनजाति बैगा निवास करती है, बैगा जनजातियों में महिला एवं बच्चों में कुपोषण और एनीमिया जैसी बीमारियों से मुक्ति दिलाना है। उन्होंने यह भी बताया कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत विशेष अभियान के रूप में कुपोषण और एनीमिया के मुक्ति दिलाने की कार्य योजना बनाई जाएगी। कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए विशेष पिछड़ी बैगा जनजाजति समुदाय के पढ़ी-लिखी बैगा युवतियों को ग्राम स्तर पर “सुपोषण दीदी“ बनाया जाएगा। प्रारंभिक चरण में जिले के 50 ग्राम पंचायतों में “सुपोषण दीदी“ का चयन किया जाएगा, जिन्हें एक निश्चित मानदेय भी दिए जाएंगे। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता 5वीं अथवा 8वीं पास निर्धारित की जाएगी। “सुपोषण दीदी“ का कार्य ग्राम स्तर पर कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए चल रहे “मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान“, महतारी जतन टीकाकरण अभियान, गर्भवती माताओं को प्रदाय की जाने वाली “गरम पका भोजन“ आंगनबाड़ी तथा स्कूलों में संचालित होने वाली सुपोषण अभियान तथा गर्भवती माताओं का नियमित जॉच तक नव गर्भवती महिलाओं का पंजीयन कराने सहित महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को जन-जन तक ग्राम स्तर पर पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। “सुपोषण दीदी“ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिनों के समन्वय से सुपोषण अभियान को मूर्त रूप देने में विशेष कड़ी की भूमिका निभाने को काम करेगी। कलेक्टर ने “सुपोषण दीदी“ की भर्ती प्रक्रिया की आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिये। बैठक में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़ाने के लिए “जचकी अगोरा घर“ कार्यक्रम की शुरूआत करने का निर्णय लिया गया। कलेक्टर ने पंडरिया में आयोजित बैठक में पंडरिया विकासखण्ड में संचालित 10 प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में विशेष रूप से “जचकी अगोरा घर“ कक्ष बनाने की आवश्यक तैयारी करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए है। 
    कलेक्टर ने पंडरिया विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य छीरपानी, कुकदूर, कुण्डा, दुल्लापुर, दामापुर, रूसे, मोहगांव और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पंडरिया में “जचकी अगोरा घर“ बनाने के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए है। बैठक में बताया गया कि “जचकी अगोरा घर“ का आशय प्रसव पीड़ा से पूर्व गर्भवती माताओं एवं महिलाओं के लिए तैयार किए जाएंगे। इस कक्ष में ऐसे गर्भवती महिलाओं को रखने का प्रावधान बनाया जाएगा, जिसका प्रसव आने की संभावना बनी रहती है। बैठक में बताया गया कि ग्रामीण अंचलों में होम डिलीवारी का बड़ा कारण यह है कि प्रसव आने से महज कुछ घंटे पहले ही महतारी एक्सप्रेस अथवा एंबुलेंस को बुलाया जाता है, चूंकि वनांचल क्षेत्र होने की वजह से वाहन पहुंचने में देरी होती है, जिससे “जच्चा और बच्चा“ दोनों के लिए खतरा बना रहता है। ऐसे गर्भवती महिलाओं को उनके प्रसव तिथि आने से पहले ही “जचकी अगोरा घर“ में रखने की योजना बनाई जा रही है। “जचकी अगोरा घर“ में आने वाले गर्भवती महिलाओं के साथ उनके परिजनों को भी ठहराया जाएगा तथा उन्हें भी निःशुल्क भोजन प्रदाय किए जाएंगे। कलेक्टर श्री शरण ने इन दानों पायलट प्रोजेक्ट को दिसंबर माह 2019 से शुरू करने के लिए निर्देश दिए है। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी श्री आनंद तिवारी, बीएमओ डॉ. राज, डीपीएम सुश्री नीलू धृतलहरे सहित दोनो विभाग के विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।