राजनांदगांव ।  मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 2019 के तहत आज जिले के 27 शिक्षकों को शिक्षादूत तथा 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. बल्देव प्रसाद मिश्र हायर सेकेण्डरी स्कूल के शहीद विनोद चौबे आडिटोरियम में आयोजित समारोह में शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र और नगद राशि से सम्मानित किया गया। डोंगरगांव विधायक श्री दलेश्वर साहू समारोह के मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में मोहला-मानपुर विधायक श्री इन्द्रशाह मंडावी, खुज्जी विधायक श्रीमती छन्नी साहू और कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य समारोह में शामिल हुए। 
    मुख्य अतिथि श्री दलेश्वर साहू ने कहा कि समाज में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने की परंपरा है। इससे अन्य लोगों को भी अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। श्री साहू ने कहा कि समारोह में उत्कृष्ट कार्य के लिए शिक्षकों को जिला स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। उनके अच्छे कार्यों का प्रतिफल यह सम्मान है। श्री साहू ने कहा कि अच्छा कार्य करने से एक अलग पहचान बनती है और मन में संतोष भी होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माता होते हैं। आने वाली पीढ़ी को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने का दायित्व शिक्षकों पर होता है। श्री साहू ने सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी योग्यता का बेहतर उपयोग करें और बच्चों को आगे बढ़ाएं।
    विधायक श्री इन्द्रशाह मंडावी ने कहा कि शिक्षा दान को सबसे बड़ा दान माना जाता है। शिक्षक अपने ज्ञान को बच्चों के बीच बांटते हैं और उन्हें जमीन से उठाकर उपलब्धि की ऊंचाईयां तक पहुचाने का प्रयास करते हैं। लगन और मेहनत से उत्कृष्ट कार्य करने के कारण आज शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है। श्री मंडावी ने शिक्षकों से आग्रह करते हुए कहा कि वे बच्चों को गुणवŸाापूर्ण शिक्षा देंगे तो उनका भविष्य उवल बनेगा। शिक्षक बच्चों के लिए पालक के समान होते हैं उन्हें बच्चों को शिक्षा के प्रति हमेशा प्रेरित करते रहना चाहिए। श्री मंडावी ने स्कूलों में व्यवहारिक और सामान्य ज्ञान की शिक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया।     
    खुज्जी विधायक श्रीमती छन्नी साहू ने कहा कि नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और संस्कार देने के लिए शिक्षकों और पालकों के बीच समन्वय होना जरूरी है। देश का भविष्य शिक्षक तैयार करते हैं। बच्चों को किसी भी क्षेत्र में सफलता मिलती है तो उसका सबसे यादा श्रेय शिक्षकों को मिलता है। समाज सेवी श्री संजय जैन ने कहा कि हर व्यक्ति की सफलता में शिक्षा का सबसे यादा महत्व होता है। शिक्षा से ही विकास के रास्ते पर चलकर मंजिल तक पहुंचा जाता है। शिक्षक नौसीखिए परिंदे को बाज बनाने का कार्य करते हैं। टूटी हुई कश्ती को भी जहाज बनाते हैं। शिक्षक बच्चों को भविष्य सवारने का वंदनीय कार्य करते हैं। 
    कलेक्टर श्री मौर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों को संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। शिक्षक बच्चों के जीवन में बदलाव ला सकते हैं। समाज और देश बनाने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। शिक्षक बच्चों में हर काम को लगन से करने के लिए प्रेरित करेंगे तो यह बच्चों की प्रवृŸिा बन जाएगी। श्री मौर्य ने कहा कि पढ़ा-लिखा इंसान हर क्षेत्र में आगे बढ़ता है। शिक्षक बच्चों को मोटीवेट करके उनका भविष्य संवार सकते हैं। श्री मौर्य ने कहा कि पहले शिक्षक बनना जुनून होता था। आज अनेक शिक्षक केवल अपने अधिकारों के बात करते हैं। दायित्वों के संबंध में चर्चा करने उन्हें फुर्सत नहीं मिलती है। 
    कलेक्टर श्री मौर्य ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी हो सकती है। सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देने वाले शिक्षक हमेशा सम्मान के पात्र होते हैं। बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य समाज को मजबूत बनाते है। श्री मौर्य ने कहा कि शिक्षकों का मन अच्छा होना चाहिए। अपने काम के प्रति लगाव होना चाहिए। वे बच्चों को सही रास्ता दिखाएंगे और मार्गदर्शन देंगे तो हर बच्चा सफलता की ओर आगे बढ़ सकता है। शिक्षकों को इसके लिए अच्छे मन से कोशिश करने की जरूरत है। जिला शिक्षा अधिकारी श्री हेमंत उपाध्याय ने मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण योजना के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर सहायक संचालक श्री आदित्य खरे, सहायक संचालक श्री  पाण्डे सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक और स्कूली बच्चे उपस्थित थे। 
सम्मानित शिक्षक -
    समारोह में शिक्षक श्री रविन्द्र कुमार दुबे, श्रीमती इंद्रा चंद्रवंशी और सुश्री बबीता गिरी को ज्ञानदीप पुरस्कार दिया गया। शिक्षक सर्वश्री श्री विजय सिंह ठाकुर, श्री महेन्द्र कुमार चंदेल, श्री अशोक कुमार साहू, श्री गिरधारी राम सहारे, श्रीमती पùा सेवता, श्रीमती मीना सोनबोईर, श्री गौतम लहरे, श्रीमती अनुपमा जैन, श्री ज्ञानदास कुर्रे, सुश्री अंजू देवांगन, श्री अमित कुमार श्रीवास्तव, श्री देवनारायण वैष्णव, श्री जयप्रकाश सिन्हा, श्रीमती विद्यामती साहू, श्री रितेश कुमार रंगारी, श्री कोमल चंद कोठारी, कुमारी प्रेरणा सिंह, श्रीमती नैना वर्मा, श्रीमती राज सोरी, श्री देवार सिंह नायक, श्री देव सिंह आंचले, श्री गंगाधीर रामटेके, श्री बाल सिंह तौप्पा, श्रीमती पùादेवी चुरेन्द्र, श्रीमती श्रीनिल अवस्थी, श्री भुनेश्वर लाल साहू तथा श्री ईश्वरदास मेश्राम को शिक्षादूत पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।